चैत्र नवरात्रि 2026 प्रथम दिन: वर्ष की पहली नवरात्रि की शुरुआत

स्तुति मंत्र—

 या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री—नवरात्री के प्रथम दिवस पर मां दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पुजा की जाती है। मां दुर्गा का पुत्री के रूप में जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ हुआ जिस कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

 



चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जो शक्ति की देवी माँ दुर्गा की उपासना को समर्पित है। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का समय है, बल्कि यह हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) के आगमन का भी प्रतिक है। इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का यह पावन उत्सव 19 मार्च से शुरू होकर 24 मार्च तक चलेगा।
नवरात्रि प्रारंभः 19 मार्च 2026 गुरूवार
घटस्थापना मुहूर्तः सुबह 06:52 से 07:43 तक
राम नवमी (समापन) 27 मार्च 2026, शुक्रवार

 
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

 
चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि की कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन 9 दिनों में माँ दुर्गा पृथ्वी पर वास करती है। और अपने भक्तों के कष्टों को दूर करके उनकी मनाकामनाएं पूर्ण करती है। 
 

शुभ रंग: पीला

यह माता शक्ति का पहला स्वरूप है। माँ शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। माँ शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधर चक्र जाग्रत एवं आत्मबल प्राप्त होता है।

 


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