स्तुति मंत्र—
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री—नवरात्री के प्रथम दिवस पर मां दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पुजा की जाती है। मां दुर्गा का पुत्री के रूप में जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ हुआ जिस कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।
नवरात्रि प्रारंभः 19 मार्च 2026 गुरूवार
घटस्थापना मुहूर्तः सुबह 06:52 से 07:43 तक
राम नवमी (समापन) 27 मार्च 2026, शुक्रवार
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि की कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन 9 दिनों में माँ दुर्गा पृथ्वी पर वास करती है। और अपने भक्तों के कष्टों को दूर करके उनकी मनाकामनाएं पूर्ण करती है।
शुभ रंग: पीला
यह माता शक्ति का पहला स्वरूप है। माँ शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। माँ शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधर चक्र जाग्रत एवं आत्मबल प्राप्त होता है।


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